29 अगस्त को बिहार के दरभंगा में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार पर की गई विवादित टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया है। इस बयान के बाद पटना समेत पूरे बिहार में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। खासतौर पर पटना में स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प और तोड़फोड़ में बदल गया।
क्या था विवाद?
दरअसल, दरभंगा में कांग्रेस के एक स्थानीय नेता द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद बीजेपी ने तीव्र विरोध जताया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस छिड़ गई। बीजेपी ने कांग्रेस पर "व्यक्तिगत हमले" और "प्रधानमंत्री का अपमान" करने का आरोप लगाया।
🪧 पटना में बीजेपी का उग्र प्रदर्शन
29 अगस्त को सुबह से ही पटना के सादाकत आश्रम स्थित कांग्रेस दफ्तर के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता अचानक उग्र हो गए और कांग्रेस कार्यालय के सामने तोड़फोड़ और मारपीट शुरू हो गई।
सामने आए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर रहे हैं। पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति कुछ देर तक बेकाबू बनी रही।
राहुल गांधी का बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक साफ और सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“सत्य और अहिंसा के आगे असत्य और हिंसा टिक ही नहीं सकते।
मारो और तोड़ो, जितना मारना-तोड़ना है, हम सत्य और संविधान की रक्षा करते रहेंगे। सत्यमेव जयते।”
राहुल गांधी के इस बयान को जहां कांग्रेस ने शांति और लोकतंत्र की रक्षा की अपील माना, वहीं बीजेपी ने इसे उल्टा घुमा कर दिखावा बताया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उनके नेता "निचले स्तर की राजनीति" कर रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ "असभ्य और अपमानजनक भाषा" का प्रयोग कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी मुद्दों से भटकाने के लिए हिंसा और धमकी का सहारा ले रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण को तेज करेगा।
👮 पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पटना पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और झड़प में घायल कुछ कार्यकर्ताओं को अस्पताल पहुंचाया। एफआईआर दर्ज की जा रही है और पुलिस ने हिंसा में शामिल लोगों की वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान शुरू कर दी है।
निष्कर्ष:
‘वोटर अधिकार यात्रा’ का मकसद भले ही लोकतांत्रिक चेतना और मतदाता अधिकारों को मजबूत करना हो, लेकिन दरभंगा की विवादित टिप्पणी और पटना में हुई झड़प ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति अब स्वस्थ संवाद की जगह व्यक्तिगत हमलों और हिंसा के रास्ते पर चल रही है?
आगामी दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पार्टियां इस विवाद को मुद्दे की राजनीति में बदलती हैं या आरोप-प्रत्यारोप और टकराव का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।