नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में गरीब बच्चों के लिए काम करने वाली एक NGO (गैर-सरकारी संगठन) उस समय विवादों में घिर गई, जब उसके अध्यक्ष के खिलाफ यौन शोषण, धार्मिक जबरदस्ती, मानहानि और साइबर स्टॉकिंग के गंभीर आरोप लगे। मानकापुर पुलिस ने आरोपी रियाज फाजिल काजी को FIR दर्ज होने के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज:
मानकापुर पुलिस ने शनिवार रात करीब 10 बजे भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसमें महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना (धारा 74), अश्लील कृत्य (296), धार्मिक भावनाओं को आहत करना (302-1), मानहानि (356-2) और IT एक्ट की धारा 66-B (सोशल मीडिया के जरिए पीछा करना) शामिल हैं।
यौन और धार्मिक उत्पीड़न के आरोप:
यौन शोषण: NGO की 23 वर्षीय एडमिन और HR हेड ने आरोप लगाया कि जुलाई 2024 में उसके जन्मदिन पर आरोपी ने उसे केबिन में बुलाकर जबरन गले लगाया और अभद्र टिप्पणी की। पीड़िता ने बताया कि नौकरी खोने के डर से वह उस समय चुप रही, लेकिन आरोपी की हरकतें बढ़ती गईं। आरोपी ने कई बार CCTV बंद कर उसे छूने की कोशिश की।
धार्मिक जबरदस्ती: पीड़िता की बड़ी बहन, जो प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में जुड़ी थी, ने आरोप लगाया कि काजी उसे एक विशेष धर्म की प्रार्थनाएं करने और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने के लिए मजबूर करता था।
साइबर स्टॉकिंग और मानहानि: आरोप है कि काजी ने महिला स्टाफ और स्वयंसेवकों की निगरानी के लिए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। अप्रैल 2024 में उसने कथित तौर पर एक पूर्व कर्मचारी की मां को फोन कर पीड़िता और उसकी बहन के लिए "कॉल गर्ल" जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
ATS और खुफिया एजेंसियों की एंट्री:
अमरावती और नासिक में हाल ही में हुए यौन और धार्मिक उत्पीड़न के मामलों के बाद, इस केस ने खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने इस NGO के बैकग्राउंड, विदेशी फंडिंग और इसके वास्तविक उद्देश्यों की समानांतर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगा रही है कि बच्चों को पढ़ाने के मिशन की आड़ में कहीं कोई और नेटवर्क तो नहीं चल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई:
वरिष्ठ निरीक्षक हरेश कलसेकर ने बताया कि कोर्ट ने आरोपी काजी को 23 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब तक तीन महिलाएं शिकायत लेकर सामने आई हैं, और पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी पीड़िताएं सामने आ सकती हैं। पुलिस अब NGO के CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और आरोपी द्वारा बनाई गई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की जांच कर रही है।