नागपुर न्यूज डेस्क: सरकारी स्वामित्व वाली एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) अपने नागपुर स्थित केंद्र को एक वैश्विक विमानन रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। कंपनी की योजना इस सुविधा का विस्तार कर घरेलू और विदेशी दोनों एयरलाइनों के विमानों के रखरखाव के लिए इसे पहली पसंद बनाने की है।
इस रणनीतिक विस्तार के तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
अंतरराष्ट्रीय मानक और प्रमाणन
EASA सर्टिफिकेशन: कंपनी यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) से प्रमाणन प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। यह मंजूरी मिलते ही नागपुर केंद्र एयरबस (Airbus) विमानों के बेस रखरखाव के लिए अधिकृत हो जाएगा, जिससे विदेशी एयरलाइनों के साथ अनुबंध करना आसान होगा।
अनुभव: यह केंद्र अब तक बोइंग 777, बोइंग 737 और एयरबस A320 परिवार के विमानों की 240 से अधिक मेंटेनेंस चेक सफलतापूर्वक पूरी कर चुका है।
नवाचार और विस्तार (P2F कन्वर्जन)
AIESL अब बोइंग 777 विमानों को यात्री विमान से मालवाहक विमान में बदलने (Passenger-to-Freighter - P2F) की क्षमता विकसित करने पर विचार कर रही है। कार्गो विमानों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए यह कदम कंपनी के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।
तकनीकी उपलब्धि: 'मृत' विमान को किया पुनर्जीवित
नागपुर हैंगर की तकनीकी दक्षता का सबसे बड़ा प्रमाण एक बोइंग विमान की बहाली है, जो फरवरी 2020 से खराब पड़ा था। मई 2025 में इस विमान ने नागपुर हैंगर में प्रवेश किया और इंजीनियरिंग टीमों ने 3,000 से अधिक महत्वपूर्ण पुर्जों को बदलकर और 4,000 रखरखाव कार्यों को पूरा कर इसे फिर से उड़ान भरने के योग्य बनाया। डीजीसीए (DGCA) की निगरानी और बोइंग के मार्गदर्शन में यह जटिल कार्य संपन्न हुआ।
बुनियादी ढांचा और चुनौतियां
नागपुर परिसर वर्तमान में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जिनमें शामिल हैं:
दो वाइड-बॉडी हैंगर
इंजन रन-अप बे और विमान धोने की सुविधा
एक बड़ा इंजन परीक्षण सेल (Engine Test Cell)
हालांकि, एक प्रस्तावित जेट इंजन शॉप का निर्माण कार्य कुछ अनसुलझे मुद्दों के कारण फिलहाल रुका हुआ है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नागपुर की भौगोलिक स्थिति और AIESL की तकनीकी विशेषज्ञता इसे भारत का सबसे उन्नत विमानन रखरखाव केंद्र बनाने के लिए पर्याप्त है।