नागपुर न्यूज डेस्क: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर नगर निगम (NMC) को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा है कि क्या वह दंगों के आरोपी फहीम खान के ध्वस्त मकान का पुनर्निर्माण करेगा या आर्थिक मुआवजा देगा। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना ही बुलडोजर कार्रवाई की गई। यह टिप्पणी जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान की।
फहीम खान, जो अल्पसंख्यक लोकतांत्रिक पार्टी के शहर अध्यक्ष बताए जाते हैं, पर नागपुर के महल इलाके में भड़की सांप्रदायिक हिंसा का मुख्य आरोप है। उनके संजयबाग कॉलोनी स्थित तीन मंजिला मकान को नगर निगम ने 25 मार्च को ध्वस्त कर दिया था। यह कार्रवाई उनकी गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद की गई। इससे पहले उनकी 69 वर्षीय मां मेहरूनिशा शमीम खान ने आपात याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने रोक भी लगाई थी, लेकिन तब तक ढांचा गिराया जा चुका था।
अदालत ने पाया कि कथित अवैध निर्माण हटाने से पहले पूर्व सूचना जारी करने और जवाब के लिए 15 दिन का समय देने जैसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। फहीम खान की ओर से पेश वकील अश्विन इंगोले ने दलील दी कि महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम के तहत जारी नोटिस सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि केवल किसी व्यक्ति के आरोपी होने के आधार पर संपत्ति ध्वस्त नहीं की जा सकती। पीठ ने इस कार्रवाई को मनमानी और असंवैधानिक बताते हुए नगर निगम से 4 मार्च तक स्पष्ट रुख बताने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि मकान के निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमति और भुगतान 2003 में ही कर दिए गए थे और दो दशक तक कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। पिछली सुनवाई में नगर आयुक्त अभिजीत चौधरी ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा था कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की जानकारी नहीं थी। उल्लेखनीय है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में फहीम खान ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। फिलहाल दंगा प्रकरण में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।