नागपुर न्यूज डेस्क: पश्चिम एशिया संकट के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा लागू किए गए ‘नो-क्रेडिट सिस्टम’ का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसी कारण सोमवार को पांच से छह पेट्रोल पंप अस्थायी रूप से बंद हो गए। पहले तेल कंपनियां खासकर डीजल की आपूर्ति उधार पर करती थीं, लेकिन संकट के बाद इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया है।
अब पेट्रोल पंप संचालकों को पहले ही भुगतान जमा करना पड़ रहा है, तभी उन्हें ईंधन की सप्लाई मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई पंपों पर समय पर पैसा जमा नहीं हो पाने के कारण ईंधन खत्म हो गया और उन्हें अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
Federation of Maharashtra Petroleum Dealers Association (फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन) की नागपुर इकाई के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने बताया कि इस नई व्यवस्था से व्यापार चक्र प्रभावित हुआ है। पहले पंप संचालकों को उधार में ईंधन मिलता था, जिसे वे ग्राहकों को भी उधार या बाद में भुगतान के आधार पर बेचते थे।
उन्होंने कहा कि अब कंपनियों से उधार बंद हो गया है, लेकिन ग्राहकों से बकाया वसूली अब भी चुनौती बनी हुई है। इससे पंप संचालकों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।