नागपुर न्यूज डेस्क: राज्य सरकार की लोकप्रिय लाड़ली बहन योजना को लगातार आर्थिक सहायता मिल रही है, जबकि दूसरी ओर क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना के लाभार्थी पिछले कई महीनों से अनुदान का इंतज़ार कर रहे हैं। जिले में इस योजना के तहत पंजीकृत लगभग 9 हजार अनाथ, निराधार और एकल पालक के बच्चों को अप्रैल 2025 से सहायता राशि नहीं मिली है, जिससे उनके पोषण और देखभाल को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बाल संगोपन योजना अनाथ और असहाय बच्चों के लिए एक अहम आर्थिक सहारा मानी जाती है। योजना के तहत 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए नियुक्त कानूनी पालक के खाते में और 10 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के स्वयं के बैंक खाते में प्रतिमाह 2250 रुपये की सहायता दी जाती है। इसी राशि से बच्चों की शिक्षा, इलाज और दैनिक ज़रूरतें पूरी होती हैं। अनुदान रुकने से पालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि लाड़ली बहन योजना पर बढ़ते वित्तीय दबाव के चलते बाल संगोपन जैसी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इस संबंध में अब तक शासन या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे लाभार्थियों और पालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
वहीं, मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना से जुड़ी महिलाओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान पात्रता से जुड़े विकल्प में हुई त्रुटियों को सुधारने के लिए सरकार ने पोर्टल में संशोधन किया है। अब लाभार्थी महिलाएं 31 मार्च 2026 तक ई-केवाईसी में सुधार कर सकेंगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद किसी भी स्थिति में संशोधन का अवसर नहीं दिया जाएगा।