नागपुर न्यूज डेस्क: बिहार में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ को लेकर सियासी हलचल अब दिल्ली से होते हुए नागपुर तक पहुंचती नजर आ रही है। संघ मुख्यालय नागपुर की बढ़ती सक्रियता ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आगामी नेतृत्व को लेकर संघ और बीजेपी के भीतर गहन मंथन जारी है, और इसी वजह से कुछ नेताओं की ‘नागपुर परिक्रमा’ चर्चा का विषय बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, बिहार में अगला मुख्यमंत्री चयन केवल राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विचारधारा और संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी अहम भूमिका निभाएगी। चर्चा है कि संघ एक ऐसे चेहरे को आगे देखना चाहता है, जिसकी छवि साफ-सुथरी हो, संगठन से गहराई से जुड़ा हो और जिसने छात्र राजनीति से लेकर पार्टी ढांचे में मजबूत काम किया हो। साथ ही, यह भी कहा जा रहा है कि नई सरकार नीतीश कुमार के स्थापित विकास और सुशासन के मानकों से आगे निकलने की चुनौती का सामना करेगी।
नागपुर से जुड़े जिन नेताओं की चर्चा तेज है, उनमें दीघा विधायक संजीव चौरसिया का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी रही है। इसके अलावा औराई विधायक रमा निषाद का नाम भी संभावित चेहरों में लिया जा रहा है, जिन्हें महिला नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं गया से कई बार विधायक रह चुके प्रेम कुमार भी इस सूची में शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका लंबा राजनीतिक अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
बीजेपी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे नेता का चयन करना है, जो न केवल राजनीतिक रूप से सक्षम हो, बल्कि जनता के बीच भरोसा कायम कर सके। अपराध और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के साथ-साथ विकास की रफ्तार को बनाए रखना भी जरूरी होगा। ऐसे में बिहार की राजनीति में ‘नागपुर कनेक्शन’ फिलहाल सबसे चर्चित और निर्णायक कारक बनता जा रहा है।