नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर जिला परिषद (जेडपी) ने दावा किया है कि उसके एआई-आधारित आंगनवाड़ी और पोषण निगरानी कार्यक्रम के तहत बच्चों में कुपोषण के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। ‘मिशन बालभरारी’ कार्यक्रम के अंतर्गत जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के मामलों में 81.25 प्रतिशत की गिरावट आई है।
जिला परिषद के अनुसार, नागपुर में 61 एआई-सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पोषण ट्रैकर के जरिए बच्चों की पोषण स्थिति की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। यह प्रणाली क्योलाबा एआई (Qolaba AI) के सहयोग से विकसित की गई है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, SAM श्रेणी के बच्चों की संख्या 923 से घटकर 173 रह गई, जबकि मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM) के मामले 4,252 से घटकर 1,196 हो गए। गंभीर रूप से कम वजन (SUW) वाले बच्चों की संख्या 1,696 से घटकर 995 और मध्यम रूप से कम वजन (MUW) वाले बच्चों की संख्या 10,397 से घटकर 4,674 रह गई।
जेडपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनी ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एआई की वजह से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। एआई प्रणाली ने बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण कर जोखिम वाले बच्चों की पहचान आसान बनाई, जिससे जरूरतमंद बच्चों तक समय पर पोषण सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकीं। SAM श्रेणी के प्रत्येक बच्चे पर प्रतिदिन लगभग 30 रुपये पोषण सहायता के रूप में खर्च किए गए।
कार्यक्रम के तहत एआई प्रणाली बच्चों की ऊंचाई, वजन और अन्य स्वास्थ्य मानकों की निगरानी करती है तथा भविष्य में गंभीर कुपोषण की आशंका वाले बच्चों की भी पहचान करती है। इन बच्चों को स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, रेफरल सेवाएं और नियमित फॉलो-अप उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा एआई-सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में इंटरैक्टिव पैनल और वर्चुअल रियलिटी हेडसेट जैसी डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने में रुचि बढ़ी है। जून 2025 में जहां इन केंद्रों में 1,608 बच्चों की उपस्थिति दर्ज हुई थी, वहीं अप्रैल 2026 तक यह संख्या बढ़कर 2,183 हो गई।