नागपुर न्यूज डेस्क: एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी के बाद गुरुवार को पार्टी ने पलटवार किया। कांग्रेस ने मोदी से कहा कि वह पार्टी पर तंज कसने और उपदेश देने के बजाय महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश में कमी जैसी समस्याओं पर ध्यान दें। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि वाराणसी, नागपुर, लखनऊ, प्रयागराज और पटना से आए चुनावी नतीजे प्रधानमंत्री की नीतियों के खिलाफ जनता के अविश्वास को दिखाते हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री को दूसरों को उपदेश देने के बजाय खुद भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस की सीटें गिनने से पहले मोदी यह भी सोचें कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी दोनों सीटें क्यों हार गई और आरएसएस के गढ़ नागपुर में कांग्रेस ने बीजेपी को कैसे हरा दिया। रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को तंज कसना बंद करना चाहिए, क्योंकि देश में करोड़ों परिवार बढ़ती महंगाई से परेशान हैं, युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं और निजी निवेश की रफ्तार भी थमी हुई है।
कांग्रेस ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई
कांग्रेस ने बुधवार को भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा था कि अगर उन्हें भरोसा है कि ईवीएम का चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता, तो उन्हें यह बात सिर्फ कहने के बजाय करके दिखानी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि आगे होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी की चुनावी ताकत पर भरोसा है, तो वह इसे अपने फैसलों से साबित करें।
पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट कर कुछ और मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकना, कथित तौर पर सूची से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करना, ज्ञानेश गुप्ता को पद से हटाना और उन्हें आजीवन कानूनी छूट देने वाले कानून को वापस लेना शामिल था। खेड़ा ने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रधानमंत्री के दावे खोखले ही रहेंगे। कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया उन एमएलसी चुनावों के एक दिन बाद आई, जिनमें बैलेट पेपर से मतदान हुआ था। ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध कर रहे विपक्षी दल लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं।