नागपुर न्यूज डेस्क: दीक्षाभूमि का व्यापक विकास अब राज्य सरकार के नए मास्टर प्लान के तहत किया जाएगा। इसका उद्देश्य परिसर को सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। इस दिशा में नागपुर महानगर विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) ने ई-निविदा जारी कर दी है, ताकि दीक्षाभूमि में सौंदर्यीकरण, मार्ग निर्माण, पौधारोपण, शिल्प कार्य और ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं वैश्विक स्तर की बनाई जा सकें।
यह विकास कार्य एक लंबित जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जो एडवोकेट शैलेश नारनवरे द्वारा नागपुर खंडपीठ में दायर की गई थी। अदालत में प्रस्तुत शपथपत्र के अनुसार, परियोजना सलाहकार मेसर्स डिजाइन एसोसिएट्स इन कॉर्पोरेशन ने भूमिगत पार्किंग निर्माण संबंधी आपत्तियों के चलते चार विकल्प तैयार किए थे। इनमें से एक योजना को स्वीकार किया गया है, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी अब भी बाकी है। अगली सुनवाई 26 फरवरी को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष होगी।
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया कि 13 दिसंबर 2025 को सामाजिक न्याय मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दीक्षाभूमि के विकास के लिए सभी कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के होंगे और इसके लिए वैश्विक निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस प्रक्रिया में पाथवे, भू-निर्माण, ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था, पौधारोपण और शिल्प कार्य जैसी सभी परियोजनाओं को आधुनिक और आकर्षक बनाया जाएगा।
एनएमआरडीए ने परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) की नियुक्ति के लिए ई-निविदा जारी की है। PMC की सलाह पर दीक्षाभूमि परिसर के सौंदर्यीकरण और सभी संरचनात्मक विकास कार्य किए जाएंगे। इस मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट शैलेश नारनवरे और एनएमआरडीए तथा नासुप्र की ओर से एडवोकेट गिरीश कुंटे पैरवी कर रहे हैं। प्रशासन का मकसद यह है कि दीक्षाभूमि न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आधुनिक शहर विकास मानकों के अनुसार भी विकसित हो।