नागपुर न्यूज डेस्क: वर्धा के प्रसिद्ध गोरस भंडार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए गोरस भंडार का निलंबित लाइसेंस तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। इस फैसले को गोरस भंडार की बड़ी जीत माना जा रहा है।
31 मई को एफडीए ने गोरस भंडार पर छापा मारकर वहां गंदगी होने का आरोप लगाया था और लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के कारण गोरस भंडार को करीब 9 लाख रुपये के दुग्ध उत्पाद नष्ट करने पड़े थे। संस्था के अध्यक्ष निलेश पाटिल ने कहा कि इस नुकसान की भरपाई अब एफडीए को करनी चाहिए।
गोरस भंडार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि एफडीए ने खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही लाइसेंस निलंबित कर दिया, जो नियमों के खिलाफ है। संस्था ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई से सैकड़ों दूध उत्पादक किसानों और हजारों ग्राहकों पर असर पड़ा।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई को गलत मानते हुए लाइसेंस तुरंत बहाल करने का आदेश दिया। अदालत के फैसले के बाद गोरस भंडार का संचालन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
निलेश पाटिल ने बताया कि गोरस भंडार एक कुटीर उद्योग है, जहां पारंपरिक तरीके से लकड़ी के चूल्हे पर दुग्ध उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उनका कहना है कि इससे उत्पादों का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर रहती है। इसलिए केवल लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल होने के आधार पर अस्वच्छता का आरोप लगाना उचित नहीं है।