नागपुर न्यूज डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अपने विजयादशमी संबोधन में राजनीतिक फायदे के लिए होने वाले प्रदर्शनों और समाज में बढ़ते मतभेदों को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत है कि समस्याओं का हल सिर्फ आंदोलन करने से ही निकलता है। उनके मुताबिक, देश के अंदर होने वाले विवादों और अशांति का फायदा वे विदेशी ताकतें उठा सकती हैं, जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं।
आरएसएस के स्थापना दिवस पर दिए गए अपने सालाना संबोधन में भागवत ने कहा कि सामाजिक समस्याओं और प्रशासन की कमियों के कारण विरोध प्रदर्शन होना स्वाभाविक है। लेकिन इनका मकसद समाधान निकालना होना चाहिए, न कि समाज में दुश्मनी और दूरी बढ़ाना। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग हों, शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने वाला प्रशासन हो या हालात पर प्रतिक्रिया देने वाले राजनीतिक नेता, सभी को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे समाज में नफरत, नाराजगी और बंटवारा बढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि भावनाएं कितनी भी तेज हों, लोगों को अपने व्यवहार और बातों में संविधान और कानून का पालन करना चाहिए।
भागवत ने राजनीतिक दलों को चेताते हुए कहा कि चुनावी फायदे, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक लाभ के लालच में सही फैसले लेने की क्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी सही नहीं है कि समाज की हर समस्या सिर्फ सरकार ही हल कर सकती है या हर समस्या का समाधान आंदोलन से ही होगा। आपसी बातचीत और समाज की पहल से भी समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं। उनके मुताबिक, जब किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा के खिलाफ नफरत को आधार बनाकर आंदोलन किया जाता है, तो भारत को कमजोर रखने की कोशिश करने वाली ताकतें इसका फायदा उठा सकती हैं। ऐसी ताकतें लोगों के बीच मतभेद बढ़ाने, संस्थाओं पर भरोसा कमजोर करने और असंतोष व अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करती हैं।
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक और युवाओं के प्रदर्शन हो रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी विरोध जताया जा रहा है। भागवत ने कहा कि अक्सर माना जाता है कि सरकार बदलने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन अतीत में ऐसा हमेशा नहीं हुआ है। उन्होंने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन का भी जिक्र किया, जो परीक्षा के पेपर लीक होने के गुस्से के कारण हुआ था। उस प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी और पुलिस ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
विदेशी ताकतों को लेकर भी किया आगाह
भागवत ने फ्रांस में हाल के तनाव और नेपाल व बांग्लादेश में पहले हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ ताकतें सामाजिक मतभेदों को बढ़ाकर भारत को कमजोर करने की कोशिश कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की नीतियों, नेतृत्व, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति बढ़ती समझ ने उसे दुनिया में एक अहम प्रतिस्पर्धी बनाया है। उनके मुताबिक, भारत के विकास से असहज ताकतें देश के अंदर मौजूद शिकायतों का इस्तेमाल कर सकती हैं और ऐसे लोगों या समूहों को समर्थन दे सकती हैं जिनकी गतिविधियों से अस्थिरता बढ़ती है।
ओटीटी और सोशल मीडिया पर नियंत्रण की जरूरत बताई
युवाओं का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि परिवार, स्कूल और समाज से मिलने वाले संस्कार और सही-गलत की समझ कमजोर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर युवाओं को बिना किसी रोक-टोक के बहुत-सी जानकारी मिलती है, जबकि कई बार वे सही और गलत के बीच फर्क नहीं कर पाते। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी कुछ पाबंदियों की जरूरत बताई और कहा कि सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने माता-पिता से बच्चों में सही-गलत समझने की क्षमता विकसित करने की अपील की। भागवत ने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि युवाओं को नशे की लत से दूर रहना चाहिए और स्वयंसेवक देशभर में नशे के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद पर भागवत ने कहा कि इसे गाने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना नागरिकों के आचरण और योगदान पर निर्भर करेगा। इसके लिए संतुलित विकास, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की के लिए ऐसा समाज चाहिए जो विविधता को स्वीकार करते हुए अपनी एकता बनाए रखे।