नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर का डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में देश का बड़ा एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। GMR Airports के चेयरमैन जीबीएस राजू ने कहा है कि भविष्य में नागपुर एयरपोर्ट को “भारत का अटलांटा” बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिस तरह अमेरिका में फेडएक्स ने डलास-फोर्ट वर्थ क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स हब में बदला, उसी तरह नागपुर भी यात्री और कार्गो सेवाओं का बड़ा केंद्र बनेगा।
जीएमआर समूह अगले दो सप्ताह में एयरपोर्ट का संचालन अपने हाथ में लेने जा रहा है। इसके बाद मौजूदा टर्मिनल का पूरी तरह नवीनीकरण किया जाएगा। साथ ही नया एकीकृत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल भी बनाया जाएगा, जिसका निर्माण लगभग 36 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। कंपनी के अनुसार नया टर्मिनल मॉड्यूलर डिजाइन पर आधारित होगा, ताकि भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने पर चरणबद्ध विस्तार किया जा सके।
जीबीएस राजू ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में देश के बड़े महानगरों के एयरपोर्ट्स पर नाइट पार्किंग की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में नागपुर एयरपोर्ट एयरलाइंस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा, जहां से सुबह की शुरुआती उड़ानों का संचालन आसान हो सकेगा। यात्री यातायात और एविएशन गतिविधियों में वृद्धि को देखते हुए अगले आठ वर्षों में यहां दूसरी रनवे भी विकसित किए जाने की योजना है।
वर्तमान में नागपुर एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता करीब 40 लाख है और वित्त वर्ष 2025-26 में यहां लगभग 25 लाख यात्रियों ने यात्रा की। एयरपोर्ट 15 से अधिक गंतव्यों से जुड़ा हुआ है और यहां बड़े स्तर पर कार्गो संचालन भी होता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नागपुर को विश्वस्तरीय एविएशन हब के रूप में विकसित करने के पक्षधर हैं।
नागपुर पहले से ही एविएशन मेंटेनेंस और रिपेयर सेक्टर का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां इंडामेर टेक्निक्स जैसी बड़ी MRO कंपनी संचालित हो रही है, जिसका अधिग्रहण हाल ही में अडानी समूह ने किया है। इसके अलावा वैश्विक एयरोस्पेस कंपनियां भी नागपुर में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। जीएमआर का कहना है कि यह पूरा प्रोजेक्ट नागपुर को मध्य भारत के सबसे बड़े एयर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।