नागपुर न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के नागपुर से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आया है, जहां नागपुर के पुलिस आयुक्त (पुलिस कमिश्नर) विश्वास नांगरे पाटिल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक हालिया सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपनी भागीदारी का पुरजोर बचाव किया है। वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी ने कांग्रेस और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा लगाए गए उन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने सिविल सेवा आचरण नियमों (सिविल सर्विस कोड ऑफ कंडक्ट) का उल्लंघन किया है।
नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस राजनीतिक विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा, "मेरा मानना है कि उस समारोह में शामिल होकर मैंने किसी भी सेवा नियम (सर्विस रूल्स) का उल्लंघन नहीं किया है।" उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए आगे कहा कि उक्त कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति का मुख्य उद्देश्य एक सामान्य सामुदायिक संपर्क (कम्युनिटी आउटरीच) कार्यक्रम का हिस्सा बनना था, ताकि पुलिस और जनता के बीच के समन्वय को बढ़ाया जा सके।
यह पूरा राजनीतिक बवाल तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो गई। इस वीडियो में आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल 'सकल हिंदू समाज' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से भाषण देते हुए दिखाई दे रहे थे। गौरतलब है कि यह विशेष कार्यक्रम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष (100 साल पूरे होने) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसे विपक्षी दलों ने राजनीतिक चश्मे से देखना शुरू कर दिया।
वीडियो सामने आने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस और मनसे (MNS) के नेताओं ने इसे लोक सेवकों के लिए तय की गई आचार संहिता का खुला उल्लंघन बताते हुए पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी। विपक्ष का तर्क था कि एक शीर्ष पुलिस अधिकारी को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के मंच पर जाने से बचना चाहिए। हालांकि, पुलिस कमिश्नर के इस बयान और कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि वे इसे महज एक सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम मान रहे हैं, न कि कोई राजनीतिक गतिविधि।