नागपुर न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के नागपुर में चल रही ग्रीष्मकालीन परीक्षाओं के बीच हॉस्टलों में रह रहे छात्र-छात्राएं प्रकृति और व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहे हैं। शहर का तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने के कारण हॉस्टलों के कमरे इस समय किसी 'भट्ठी' की तरह तप रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में अधिकांश शासकीय और निजी हॉस्टलों में ठंडक के नाम पर सिर्फ साधारण पंखे लगे हैं, जो रात-दिन केवल गर्म हवा उगल रहे हैं, जिससे छात्रों के लिए पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना नामुमकिन होता जा रहा है।
देर रात तक जागकर परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि रात के समय भी लू और गर्म हवाओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। जब छात्रों ने इस बदहाली को लेकर हॉस्टल प्रबंधन और वार्डन से कूलर या अन्य वैकल्पिक सुविधाएं देने की गुहार लगाई, तो उन्हें हर बार नियमों का हवाला देकर टका सा जवाब दे दिया गया। वार्डन का साफ कहना है कि हॉस्टल के बजट या प्रावधानों में कूलर लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसा ही निराशाजनक आलम नागपुर विश्वविद्यालय के पीजी हॉस्टलों में भी बना हुआ है, जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए छात्र तरस रहे हैं।
इस बीच बेसा स्थित एक निजी महिला हॉस्टल से थोड़ी राहत भरी खबर आई है, जहां छात्राओं की लगातार शिकायतों और दबाव के बाद प्रबंधन ने किराए पर चार कूलर की व्यवस्था की है। हालांकि, पूरे हॉस्टल की आबादी को देखते हुए यह सीमित इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है, लेकिन इससे छात्राओं को उमस भरी गर्मी से फौरी राहत जरूर मिली है। दूसरी ओर, डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसे वेंटिलेशन विहीन और अत्यधिक गर्म वातावरण में लगातार रहने से छात्रों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, चक्कर आना और सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
परीक्षाओं के इस नाजुक समय में छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य को दांव पर लगता देख अब अभिभावकों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। विद्यार्थियों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि प्रशासनिक स्तर पर एक विशेष टीम गठित कर सभी हॉस्टलों का औचक निरीक्षण कराया जाए और छात्रों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कमरों में अस्थाई रूप से कूलर व पर्याप्त वेंटिलेशन की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।