नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के वाड़ी थाना अंतर्गत दावलामेथी की म्हाडा कॉलोनी (Mhada Colony) से एक दिल दहला देने वाली और बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक बंद मकान में 77 वर्षीय सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारी (Retired Defence Employee) और उनकी 75 वर्षीय बिस्तर पर पड़ी (Bedridden) बीमार पत्नी के शव बरामद हुए हैं।
पुलिस जांच और परिस्थितियों से जो कहानी सामने आई है, वह बेहद दर्दनाक है। पति की अचानक मौत होने के बाद, बिस्तर से उठने में असमर्थ लाचार पत्नी ने भूख, प्यास और नागपुर की भीषण गर्मी के कारण तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
40 साल का साथ और एक दर्दनाक अंत
मृतकों की पहचान गंगाधर भोंगड़े (77) और उनकी पत्नी कौशल्या भोंगड़े (75) के रूप में हुई है। दोनों की शादी को 40 साल हो चुके थे। हालांकि दोनों की अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन गंगाधर ने कौशल्या की पहली शादी से हुए चार बच्चों को पूरी तरह अपनाया था और पिछले कई दशकों से अपनी बीमार पत्नी की सेवा कर रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक दोनों के बीच गहरा प्रेम था और वे एक-दूसरे के सहारे ही जी रहे थे।
इस तरह हुआ घटना का खुलासा
शुक्रवार को कौशल्या के पहले पति से हुई बेटी के पति (दामाद) मोहम्मद गौस बुजुर्ग दंपती से मिलने उनके घर पहुंचे थे। वहां घर का दरवाजा अंदर से बंद था और अंदर से भयंकर दुर्गंध आ रही थी। इसके बाद पड़ोसियों की मदद से घर का दरवाजा तोड़ा गया, तो भीतर का नजारा देखकर सबकी रूह कांप गई। गंगाधर का शव रसोई (किचन) में पड़ा था, जबकि कौशल्या दूसरे कमरे में बिस्तर पर मृत पड़ी थीं।
पुलिस की शुरुआती जांच और अनुमान
वाडी थाना पुलिस, फॉरेंसिक टीम और खोजी कुत्तों के साथ मौके पर पहुंची। घर में चोरी, लूटपाट या किसी भी तरह की जबरदस्ती (Foul Play) के कोई निशान नहीं मिले हैं। घर का सारा सामान सुरक्षित था। पुलिस का अनुमान है:
किचन में गिरे पति: 26 मई की रात के आसपास गंगाधर शायद किचन में अचानक फिसल कर गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। वे वहां से उठ नहीं पाए और पास में रखा उनका साधारण मोबाइल फोन भी बंद हो गया, जिससे वे किसी को बुला नहीं सके और वहीं उनकी मौत हो गई।
भूख-प्यास से तड़पी पत्नी: कौशल्या पूरी तरह से पति पर ही निर्भर थीं और खुद हिलने-डुलने में असमर्थ थीं। पति की मौत के बाद वे न तो मदद के लिए बाहर जा सकीं और न ही पानी व भोजन तक पहुंच पाईं। नागपुर की रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बीच, उन्होंने कई दिनों तक तड़पने के बाद डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और भुखमरी के कारण दम तोड़ दिया।
अखबारों से खुला राज: घर के बाहर 27, 28 और 29 मई के अखबार बिना उठे पड़े हुए थे, जिससे साफ है कि यह हादसा 26 मई की रात को ही शुरू हो गया था। डॉक्टरों के मुताबिक गंगाधर का शव पूरी तरह सड़ चुका था, जबकि कौशल्या का शव कम सड़ा था, जो यह साबित करता है कि वे पति की मौत के बाद भी कुछ दिनों तक जिंदा थीं।
रेडियो बजता रहा, पड़ोसी समझते रहे सब ठीक है
इस घटना का एक सबसे दुखद पहलू यह भी रहा कि इस बुजुर्ग दंपती को संगीत का बहुत शौक था। उनके घर का रेडियो हमेशा चालू रहता था। इन तीन-चार दिनों के दौरान भी घर के भीतर रेडियो बज रहा था, जिसकी वजह से पड़ोसियों को लगा कि सब कुछ सामान्य है और किसी को भी अनहोनी का शक नहीं हुआ।
मदद आने में हो गई देर
पता चला है कि शनिवार (23 मई) को गंगाधर ने अपनी बड़ी बेटी से फोन पर बात की थी और अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए अस्पताल जाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बेटी से कौशल्या की देखभाल के लिए आने को कहा था। बेटी ने उन्हें जून के पहले हफ्ते में आने का आश्वासन दिया था, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया। कौशल्या के दो बेटों में से बड़ा बेटा 2018 से लापता है और छोटे बेटे की 2025 में मौत हो चुकी है।
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और प्राथमिक रूप से इसे प्राकृतिक लेकिन बेहद दर्दनाक और अकेलेपन के कारण हुई मौत का मामला मानकर आगे की जांच कर रही है।