नागपुर न्यूज डेस्क: शनिवार को सूर्यास्त के तुरंत बाद नागपुर में अचानक तेज हवाओं का एक झोंका शहरभर में छा गया, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को भीषण गर्मी से कुछ हद तक राहत मिली। यह तेज आंधी केवल 15 मिनट तक चली, लेकिन इसने अपने साथ धूल और सूखी पत्तियों का गुबार उड़ा दिया, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। दिन की शुरुआत में पारा 43.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिसके बाद यह मौसम का बदलाव लोगों के लिए पूरी तरह से अप्रत्याशित था।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने नागपुरवासियों को चौंका दिया और शहर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। तेज हवाएं घरों, बहुमंजिला इमारतों और बंगलों के अंदर तक घुस गईं, जिससे बर्तन, कपड़े और अन्य सामान इधर-उधर उड़ने लगे। सड़कों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर प्लास्टिक का कचरा बिखर गया, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि, इस दौरान सड़क किनारे दुकान लगाने वाले और वाहन चालक खुले में ही फंस गए थे।
तूफान के बाद कुछ चुनिंदा स्थानों पर हल्की बारिश भी दर्ज की गई। किसी बड़ी सार्वजनिक या निजी संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली, लेकिन निर्माणाधीन स्थलों पर कुछ छोटी-मोटी घटनाएं जरूर हुईं। सड़क निर्माण और रियल एस्टेट परियोजनाओं से उड़ी धूल ने आंधी के दौरान स्थिति को और खराब कर दिया। डब्ल्यूएचसी रोड (WHC Road) जैसी कई जगहों पर पेड़ों की बड़ी शाखाएं टूटकर गिर गईं और जीपीओ (GPO) में एक ग्रीन नेट भी क्षतिग्रस्त हो गई।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सोमवार से अगले तीन दिनों तक और अधिक गरज के साथ छींटे पड़ने और बारिश की संभावना है। अधिकारियों ने इस अचानक आए तूफान का कारण 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान से उत्पन्न स्थानीय संवहन (local convection) को बताया है। इसके अलावा, आईएमडी ने पूर्वानुमान जताया है कि मई में विदर्भ में लू (heatwave) के दिन सामान्य से अधिक हो सकते हैं, जो जल संसाधनों, फसलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।