नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में अधिक मुनाफे का लालच देकर मासूम निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। शहर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 'मनीएज ग्रुप' (Moneyage Group) और उसके संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज किया है। अब तक की गई पुलिस जांच में करीब 3.04 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हो चुकी है। इस जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता राहुल अरविंद पाटिल ने सीताबर्डी थाने में आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई।
ठगी का यह खेल बेहद शातिराना तरीके से रचा गया था। कंपनी ने निवेशकों को लुभाने के लिए 12 से 15 प्रतिशत तक के भारी वार्षिक रिटर्न का वादा किया था। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने जगह-जगह कार्यशालाएं (Workshops) आयोजित कीं, जहाँ निवेश के गुर सिखाने के नाम पर लोगों को बरगलाया गया। बिना किसी वैध सरकारी लाइसेंस के, आरोपियों ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाए और निवेशकों को फर्जी प्रमाणपत्र देकर यह यकीन दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है।
जब निवेश की अवधि पूरी हुई, तो न तो किसी को ब्याज मिला और न ही मूल राशि वापस की गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने राजीव जाधव, हरिप्रसाद वेणुगोपाल, प्रिया प्रभु, जितिन गुप्ता और चिराग सोमय्या जैसे मुख्य संचालकों के खिलाफ शिकंजा कसा है। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (विश्वासघात) और एमपीआईडी एक्ट (MPID Act) की कड़ी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों ने निवेशकों की गाढ़ी कमाई को अपने निजी हितों के लिए हड़प लिया।
फिलहाल, पुलिस इस घोटाले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ठगी का यह आंकड़ा 3 करोड़ से भी ऊपर जा सकता है। आर्थिक अपराध शाखा ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी लुभावने वादे वाले निवेश से बचें जिसका कोई कानूनी आधार न हो। शहर में इस कार्रवाई के बाद से फर्जी निवेश कंपनियां चलाने वाले गिरोहों में हड़कंप मचा हुआ है।