नागपुर न्यूज डेस्क: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बीच काठमांडू में फंसे नागपुर के 106 तीर्थयात्रियों में से 105 शुक्रवार दोपहर भारत लौट आए। हालांकि, 73 वर्षीय विमला पांडे अभी भी काठमांडू के अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बाढ़ और भूस्खलन से एक दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें शहीद गंगालाल नेशनल हार्ट सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने फिलहाल अस्थायी पेसमेकर लगाया है, लेकिन शुगर कंट्रोल होने के बाद एंजियोप्लास्टी और स्थायी पेसमेकर की जरूरत बताई है।
विमला पांडे के बेटे रुपेश पांडे ने बताया कि परिवार उन्हें इलाज के लिए नागपुर लाना चाहता है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय के अधिकारी से मुलाकात कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था कराने की अपील की है। तीर्थयात्रियों के समूह का नेतृत्व धार्मिक गुरु बटुक महाराज कर रहे थे। समूह पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन और राम कथा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नेपाल गया था। बाढ़ से ठीक पहले विमला की तबीयत खराब होने के बाद परिवार को जानकारी दी गई थी।
बटुक महाराज के मुताबिक, विमला के इलाज में मदद के लिए लौटने से पहले समूह के सदस्यों ने अपने बचे हुए पैसे अस्पताल में जमा कर दिए। इसके बाद उनका पोता आदित्य पांडे भी काठमांडू पहुंच गया और अब अस्पताल में उनके साथ है। वहीं, इलाज में अधिकांश पैसे खर्च हो जाने के कारण भारत लौटे यात्रियों के पास भी पैसे की कमी हो गई। महाराज ने बताया कि मुश्किल सफर के दौरान समूह को करीब दो दिन तक खाना भी नहीं मिल सका। भारी बारिश और खराब रास्तों के कारण उन्हें तय रास्ते से ज्यादा लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
कुछ यात्रियों ने सड़क की खराब हालत और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए हवाई रास्ते से भारत लौटना बेहतर समझा। चार यात्री विमान से भारत पहुंचे, जबकि बाकी ने सड़क मार्ग चुना। बसों को मुख्यमंत्री कार्यालय की मदद से काठमांडू भेजा गया था, लेकिन खराब मौसम के कारण रास्ते में उन्हें रोककर वापस काठमांडू भेज दिया गया। बाद में मौसम में सुधार होने पर बसें करीब 10 बजे रवाना हुईं। कुछ यात्रियों ने सड़क यात्रा को जोखिम भरा मानते हुए फ्लाइट से दिल्ली पहुंचना चुना और वहां से ट्रेन के जरिए नागपुर के लिए रवाना हुए। भारत-नेपाल सीमा पर पहुंचे बाकी तीर्थयात्रियों ने आर्थिक मदद की अपील की है, क्योंकि लंबी यात्रा और इलाज में पैसे खर्च होने के बाद उनके पास घर लौटने के लिए पर्याप्त धन नहीं बचा है।