नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर विभाग स्नातक मतदाता संघ की चुनावी तस्वीर नामांकन के आखिरी दौर में अचानक बदल गई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया, जिसके बाद पार्टी के संभावित उम्मीदवार संजय थूल की सोमवार को तय नामांकन रैली ऐन वक्त पर रद्द कर दी गई। थूल भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और पिछले कुछ दिनों से बसपा के संभावित उम्मीदवार के तौर पर प्रचार कर रहे थे।
संविधान चौक से नामांकन के लिए रैली निकालने की तैयारी थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए थे। दोपहर में अचानक उन्हें कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी दी गई। शुरुआत में इसे 'तकनीकी कारण' बताया गया, लेकिन बाद में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील डोंगरे ने साफ किया कि पार्टी ने विधान परिषद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पार्टी के फैसले का पालन करने और संगठन से जुड़े कामों पर ध्यान देने को कहा।
हालांकि, बसपा से टिकट नहीं मिलने के बाद संजय थूल ने चुनाव से पीछे हटने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया और 6 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। थूल का कहना है कि स्नातक मतदाता संघ से चुना जाने वाला प्रतिनिधि सिर्फ उच्च शिक्षित होना ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए काम करने वाला भी होना चाहिए। इस सीट पर अब अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
नागपुर स्नातक सीट पर बसपा की पहले भी मौजूदगी रही है। 2014 के चुनाव में बसपा के उम्मीदवार और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी किशोर गजभिये को 18,526 वोट मिले थे। वहीं 2020 के चुनाव में भी बसपा की उम्मीदवारी को लेकर विवाद हुआ था और आखिरकार पार्टी चुनावी मैदान से बाहर हो गई थी। इस बार भी आखिरी समय में बसपा के पीछे हटने से पार्टी की चुनावी रणनीति चर्चा में आ गई है, जबकि संजय थूल के निर्दलीय मैदान में उतरने से चुनावी समीकरण में एक और उम्मीदवार जुड़ गया है।