नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर नगर निगम (NMC) की आम सभा की बैठक में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के दो ही अंतरे गाए जाने के मामले ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तूल पकड़ लिया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी व आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पूरे छः अंतरों का गायन (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड) अनिवार्य किया गया है।
राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में वंदे मातरम् के दो अंतरे गाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खर्गे पर कड़ा हमला बोला था। ऐसे में खुद भाजपा शासित नगर निगम की बैठक में केंद्र के स्पष्ट निर्देशों का पालन न होना नगर निगम प्रशासन की गंभीर कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और वैधानिक ढांचा
प्रशासन का पक्ष: विवाद सामने आने के बाद नगर निगम सचिव रंजना लाडे ने कहा कि रिकॉर्डिंग कैसेट की तकनीकी जांच की जा रही है कि राष्ट्रगीत बीच में ही क्यों रुक गया या केवल दो ही अंतरे क्यों बज सके।
कानूनी प्रावधान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मंजूरी प्राप्त 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम' के तहत 'वंदे मातरम्' को वैधानिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रगीत के अपमान या इसके पूर्ण गायन में बाधा पहुंचाने को दंडनीय अपराध माना गया है।