​होर्मुज संकट की दोहरी मार: विदर्भ से चावल निर्यात ठप, 15 दिनों में 500 डॉलर बढ़ा समुद्री मालभाड़ा

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Posted On:Saturday, June 27, 2026

नागपुर न्यूज डेस्क: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आंशिक रूप से खुलने के कारण उपजे ताजा वैश्विक संकट के बीच, शिपिंग लाइनों ने भारत से कार्गो की नई बुकिंग लेने पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी है। इस अचानक आए ठहराव के कारण विदर्भ और मध्य भारत के चावल निर्यातकों पर बेहद बुरा असर पड़ा है और उनकी निर्यात मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

​इस संकट को और गहरा करते हुए, समुद्री मालभाड़े (freight charge) में महज दो सप्ताह के भीतर 500 डॉलर प्रति टन की भारी बढ़ोतरी हो गई है, जिसमें चार दिन पहले की गई 250 डॉलर की वृद्धि भी शामिल है। इसके बाद अब मालभाड़ा बढ़कर 2,000 से 2,200 डॉलर प्रति टन के बीच पहुंच गया है। शिपिंग की भाषा में इसे 'जनरल रेट इंक्रीज' (GRI) कहा जाता है। विदर्भ उद्योग संघ (VIA) के मुताबिक, चावल व्यापारियों के लिए भाड़ा कुल निर्यात लागत का लगभग 8% होता है, इसलिए इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने उनकी पूरी वित्तीय गणना को बिगाड़ कर रख दिया है।

​हैरानी की बात यह है कि विदर्भ और छत्तीसगढ़ से पश्चिम अफ्रीकी देशों को भेजे जाने वाले गैर-बासमती और उबले (parboiled) चावल के जहाज 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते सफर करते हैं, और इस रूट पर होर्मुज जलडमरूमध्य आता भी नहीं है। इसके बावजूद वैश्विक लॉजिस्टिक्स के जटिल संकट ने इस स्थिति को जन्म दिया है। दरअसल, भारत में आयात कम होने से जहाज खाली कंटेनरों के साथ भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं, और बंदरगाहों पर भारी भीड़ के कारण जहाजों को लंगर डालने की जगह नहीं मिल रही है। इस कंटेनर संकट और घरेलू स्तर पर डीजल के ऊंचे दामों ने भारतीय रुपये में आ रही गिरावट से निर्यातकों को मिलने वाले फायदे के सुनहरे मौके को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

​इस दोहरी मार के कारण मध्य भारत से होने वाला चावल का व्यापार पूरी तरह चरमरा गया है और निर्यातकों के कारोबार में भारी गिरावट आई है। संकट की इस घड़ी में 'राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन' ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने और बढ़े हुए मालभाड़े के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकार निर्यातकों को तत्काल लॉजिस्टिक्स सब्सिडी (माल ढुलाई सब्सिडी) प्रदान करे।


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