नागपुर न्यूज डेस्क: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छह वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने NEP को "नागपुर एजुकेशन पॉलिसी" बताते हुए आरोप लगाया कि इसे संसद में चर्चा के बिना लागू किया गया था।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 29 जुलाई 2020 को लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को न तो संसद में चर्चा के लिए रखा गया और न ही केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) से मंजूरी ली गई। उन्होंने दावा किया कि आज इस नीति के प्रमुख स्तंभ कमजोर पड़ चुके हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि NTA की विश्वसनीयता पूरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री का भी जिक्र करते हुए कहा कि NEP को लागू करने के लिए राज्यों पर दबाव बनाने वाले मंत्री को भी पद छोड़ना पड़ा।
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान' से जुड़ा प्रस्ताव संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में लंबित है और पिछले कुछ हफ्तों में समिति की बैठकें भी रद्द करनी पड़ी हैं।
उन्होंने 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने उस नीति पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई थी। उन्होंने कहा कि उसी नीति के तहत स्थापित जवाहर नवोदय विद्यालय आज भी लाखों छात्रों के लिए सामाजिक और शैक्षिक बदलाव का माध्यम बने हुए हैं।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही तो उनकी पार्टी जल्द ही देशभर में नया आंदोलन शुरू करेगी।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रस्तावित आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने पहले प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की बात कही थी, फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को, यदि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, रिहा किया जाए। हालांकि मामले की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।