नागपुर न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र में सूखे का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार ने मंगलवार को 18 और तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला लिया, जिसके बाद ऐसी तहसीलों की संख्या बढ़कर 302 हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रिमंडल की बैठक में हालात की समीक्षा करते हुए 10 फीसदी पानी की कटौती सख्ती से लागू करने और सूखाग्रस्त इलाकों में रोजगार गारंटी योजना के काम बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों को दिवाली से पहले राहत राशि मिल सके।
सूखाग्रस्त तहसीलों में फसल नुकसान के पंचनामे 20 अक्टूबर तक पूरे करने को कहा गया है। जिलाधिकारियों को इसके लिए 5 फीसदी निधि अलग रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार के मुताबिक 265 तहसीलों के 32,823 गांवों में अब तक 17,941 गांवों में 38.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल नुकसान का सर्वे पूरा हो चुका है। यानी करीब 45 फीसदी पंचनामे किए जा चुके हैं।
बैठक में फसल कर्ज को लेकर बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई गई। सरकार के मुताबिक अभी तक सिर्फ 8 फीसदी फसल कर्ज बांटा गया है। बैंकों से कहा गया है कि किसानों से बार-बार दस्तावेज न मांगे जाएं और जिन किसानों ने पहले फसल कर्ज लिया है, उनसे दोबारा बेवजह कागजात न लिए जाएं। साथ ही राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के अलावा वित्तीय संस्थानों को कर्ज वसूली के लिए किसानों को फोन कर परेशान न करने की चेतावनी दी गई है। ऐसा होने पर कार्रवाई की जाएगी।
सूखे के बीच पशुओं के चारे की कमी से निपटने के लिए सरकार ने चारा बैंक बनाने पर भी जोर दिया है। वन विभाग, पड़ीक जमीन और जलसंपदा विभाग के तालाबों के आसपास की सरकारी जमीन पर ग्रासलैंड विकसित करने की योजना है। ग्राम पंचायतों के जरिए चारा डेपो शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं, जिन इलाकों में नमी या पानी बचा हुआ है, वहां रबी सीजन में चना और ज्वार की बुवाई को प्राथमिकता देने की तैयारी है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कृषि संकट के साथ पेयजल संकट भी बढ़ सकता है और इस मुश्किल समय में सरकार किसानों के साथ खड़ी है।