नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के कुछ तीर्थयात्री रविवार सुबह नेपाल से बिहार के रास्ते सुरक्षित शहर लौटे। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को काठमांडू से चार मिनी बसों में रवाना होने के बाद वे एक ऐसे पुल से गुजरे, जो कुछ ही सेकंड बाद तेज पानी के बहाव में टूटकर बह गया। यात्रियों के मुताबिक, उनके चारों वाहन पुल पार कर चुके थे, जबकि उनके पीछे चल रही एक दूसरी बस, जिसमें संभवतः भारतीय यात्री सवार थे, पुल के साथ बह गई।
यात्री योगेश गावंडे ने बताया कि बाढ़ के पानी के कारण कई जगह सड़क और पुलों पर पानी बह रहा था। चालक बेहद धीमी रफ्तार से बसों को आगे बढ़ा रहे थे। घने कोहरे के कारण सुबह के समय दृश्यता भी काफी कम थी और रास्ते में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ था। उन्होंने बताया कि चारों बसों के पुल पार करने के कुछ ही पल बाद पुल पानी में बह गया।
नेपाल में फंसे संगीतकार दशरथ यादव समेत कई यात्रियों ने सफर को बेहद डरावना बताया। दशरथ 19 अगस्त को कीर्तन-भजन महोत्सव के लिए नेपाल गए थे और 26 अगस्त को लौटना था, लेकिन बाढ़ के कारण वहीं फंस गए। श्रद्धालु सुशीला मोंडे और श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि कई जगह सड़कें बह चुकी थीं और तेज धार के बीच वाहन आगे बढ़ रहे थे। श्रीधर ने कहा कि हर कदम पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं अगला पल क्या होगा।
यात्रियों ने बताया कि मुश्किल रास्तों को पार करने में स्थानीय ड्राइवरों और नेपाल में पंजीकृत छोटी गाड़ियों ने काफी मदद की। स्थानीय लोग रास्तों की स्थिति से परिचित थे, इसलिए उनकी मदद से समूह धीरे-धीरे बाढ़ प्रभावित इलाकों से बाहर निकल सका। सुरक्षित भारत पहुंचने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली और कहा कि नेपाल से वापसी का यह सफर वे शायद ही कभी भूल पाएंगे।