नागपुर न्यूज डेस्क: विदर्भ में इस समय 'नवतपा' (नौतपा) की भीषण तपिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह झुलसा कर रख दिया है। इस अत्यधिक प्रतिकूल मौसम में राष्ट्रसंत टुकडोजी महाराज नागपूर विश्वविद्यालय (RTMNU) की ओर से आयोजित की जा रही परीक्षाएं छात्रों के लिए सचमुच 'अग्निपरीक्षा' साबित हो रही हैं। दोपहर की कड़कड़ाती धूप में परीक्षा केंद्र पहुंचते-पहुंचते छात्रों का हाल बेहाल हो रहा है, जिसे देखते हुए अब छात्रों और अभिभावकों की ओर से परीक्षाओं को आगे बढ़ाने या समय में बदलाव करने की मांग तेज हो गई है।
दोपहर के समय ने बढ़ाई मुसीबत:
विश्वविद्यालय के अंतर्गत बी.एससी. (B.Sc.) समर 2026 के छठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं 26 मई से शुरू हो चुकी हैं, जो 23 जून तक चलेंगी। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन परीक्षाओं का समय दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रखा गया है। यह समय दिन का सबसे गर्म हिस्सा माना जाता है, जिसके कारण छात्रों को भीषण लू और चिलचिलाती धूप के बीच परीक्षा केंद्रों के लिए निकलना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों की व्यथा:
ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है। कई विद्यार्थियों को 10 से 12 किलोमीटर तक का सफर साइकिल से या सरकारी बसों और अन्य साधनों के जरिए तय करना पड़ता है। तपती दोपहर में डामर की सड़कों से गुजरते हुए लू के थपेड़े सहना बेहद मुश्किल हो रहा है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा देने से पहले ही सफर के दौरान उनके शरीर की पूरी ऊर्जा खत्म हो जा रही है।
परीक्षा केंद्रों पर सुविधाओं की कमी:
एकाग्रता भंग होना: ज्यादातर परीक्षा केंद्रों पर कूलिंग या पर्याप्त पंखों की व्यवस्था नहीं है, जिससे क्लासरूम के भीतर भयंकर उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
तबीयत बिगड़ने का डर: पसीने से तर-बतर होकर पेपर लिखते समय छात्रों की एकाग्रता टूट रही है। अभिभावकों को डर है कि इस जानलेवा गर्मी के कारण बच्चों को हीटस्ट्रोक (लू लगना), चक्कर आना या अन्य स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा:
छात्रों की सेहत से ज्यादा परीक्षा के टाइमटेबल को प्राथमिकता दिए जाने पर अभिभावक बेहद नाराज हैं। उनका सवाल है कि यदि बच्चों का भविष्य बनाने वाली ये परीक्षाएं ही उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाएं, तो ऐसे प्रशासनिक नियोजन का क्या फायदा?
विद्यार्थियों की मुख्य मांगें:
सुबह की शिफ्ट में हों परीक्षाएं: दोपहर के बजाय इन परीक्षाओं को सुबह 9 या 10 बजे की शिफ्ट में आयोजित किया जाए ताकि छात्र धूप से बच सकें।
परीक्षाएं स्थगित की जाएं: जब तक नौतपा का असर कम नहीं होता और तापमान में गिरावट नहीं आती, तब तक के लिए परीक्षाओं को कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाए।
अब देखना यह है कि क्या नागपूर विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की इस जायज परेशानी को समझते हुए उनके हित में परीक्षा के समय में कोई सकारात्मक बदलाव करता है या नहीं।