एसबीआई कर्मचारी 'लोक सेवक' नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने धारा 353 के आरोप पर सुनाया अहम फैसला

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Posted On:Saturday, September 5, 2026

नागपुर न्यूज डेस्क: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का कर्मचारी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 21 के तहत ‘लोक सेवक’ की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इसी आधार पर एक बैंक कर्मचारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 353 के तहत लगाए गए आरोप को सही नहीं माना। धारा 353 में सरकारी काम कर रहे लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से जुड़ा मामला दर्ज किया जाता है।

मामला अकोला जिले के बार्शीताकली इलाके में एसबीआई के एक कर्मचारी से जुड़ा था। प्रतिभा शिक्षण प्रसारक मंडल के अध्यक्ष मधुकर पवार ने कर्मचारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आईपीसी की धारा 353, 504 और 506 लगाई गई थीं। 9 नवंबर 2025 को सेशन कोर्ट ने कर्मचारी की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर धारा 353 के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद कर्मचारी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

नागपुर बेंच ने सेशन कोर्ट के इस फैसले को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बैंक में नौकरी करने की वजह से किसी कर्मचारी को आईपीसी की धारा 21 के तहत हर अपराध के लिए लोक सेवक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस मुद्दे पर पहले दिए गए फैसलों का भी हवाला दिया और स्पष्ट किया कि बैंकिंग से जुड़े कानून भी बैंक कर्मचारियों को हर मामले में लोक सेवक की श्रेणी में नहीं रखते। इसलिए इस मामले में धारा 353 के तहत आरोप तय करना उचित नहीं था।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों के साथ मारपीट और हमले की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। यूएफबीयू के पुणे संयोजक विट्ठल माने की ओर से साझा की गई एक सूची में अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग बैंकों में कर्मचारियों के साथ हुई कई घटनाओं का जिक्र है। इनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक समेत कई बैंक शामिल हैं। सूची में बीएनएस की अलग-अलग धाराओं का उल्लेख है। साथ ही नोट में कहा गया है कि जहां लागू हो, एफआईआर में बीएनएस की धारा 121(2) शामिल की जानी चाहिए, क्योंकि यह गैर-जमानती प्रावधान है। हालांकि, एफआईआर दर्ज करने से पहले बैंक प्रबंधन की अनुमति लेने की बात भी कही गई है।


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